पुलिस का कहना ज़मानत पर थाना से किया गया रिहा, जबकि वरिष्ठ अधिकवक्ता बता रहे गैरजमानतीय धारा में थाना से नही मिलती बेल

रायपुर। नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाली ममता शर्मा के पुत्र हर्षवर्धन शर्मा पर थाना सिविल लाइन में दर्ज हुए गंभीर धाराओं में अपराध के बाद पुलिस 4 दिनों बाद भी हर्षवर्धन एवं उसके साथी आरोपी सौरभ सबलानी व हिमांशु कटवानी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है।आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान का ढिंढोरा पीटने वाली ममता शर्मा के बेटे हर्षवर्धन शर्मा ने सत्ता शराब और मादक पदार्थ के नशे में धुत होकर अपने अन्य साथी गुंडों के साथ बैंक कर्मचारी के साथ गाली गलौज की और शराब पीने के लिए पैसे मांगे, पैसे नहीं देने पर हर्षवर्धन और उसके साथियों ने मारपीट की व उसकी जान लेने की कोशिश की। बाद में शर्मा द्वारा उसका पर्स ,मोबाइल फोन और बाइक की चाबी लूट ली गई। घटना को अब 4 दिन बीत चुके हैं और सिविल लाइन थाना पुलिस ने अब तक हर्षवर्धन एवं उसके अन्य दो साथियों को गिरफ्तार नहीं किया है ।


बता दें कि ममता शर्मा ने भी कुछ वर्ष पहले पुलिस थाना में घुसकर पुलिसकर्मियों से बदतमीजी कर मारपीट की थी। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि पीड़ित बैंक कर्मचारी ने हाथ जोड़कर हर्षवर्धन से उसे ना मारने की विनती भी की थी इसके बावजूद उसके साथियों द्वारा उसे टेबल पर पटक पटक कर मारा गया और नशे में धुत युवकों ने गाली-गलौज करते हुए ब्लू स्काई कैफे में खुलेआम गुंडागर्दी की।


आपको बता दे कि पुलिस द्वारा इस मामले में कहा गया कि हर्षवर्धन को गिरफ्तार कर थाना से मुचलका धारा पर रिहा किया गया जबकि वरिष्ठ अधिकवक्ता का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 327 गैरजमानतीय धारा है व उसके लिए आरोपी को कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही पेश करना होता है, थाना से केवल जमानतीय धाराओं में ही रिहा किया जा सकता है। अब यह समझने वाला विषय होगा कि पुलिस प्रशासन झूठ कहकर आरोपी को बचा रही है या किसी राजनीतिक दवाब के चलते खुले आम गुंडागर्दी करने वाले रहिसज़ादों को शहर का माहौल बिगाड़ने में मदद कर रही है।

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