बलात्कार के आरोप में जेल गए कुछ आरोपी अपने मूल पद में हैं पदस्थ लेकिन कुछ धान माफिया जनता के चहेते थानेदार को हटाना चाह रहे हैं क्यो

छुरा: बेमौसम बारिश के कारण धान की कटाई में हो रही देरी के कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के किसानों को राहत देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की तारिख को एक दिसंबर 2019 कर दिया है। इससे पहले 15 नवंबर से राज्य की मंडियों से धान की खरीद का लक्ष्य तय किया गया था। राज्य के किसानों से धान की खरीद 2,500 रुपये रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जायेगी, जोकि केंद्र द्वारा तय समर्थन मूल्य से 36.23 फीसदी ज्यादा है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान की समर्थन मूल्य पर खरीद एक दिसंबर से 15 फरवरी 2019तक करने का निर्णय लिया है। राज्य के किसानों से धान 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जायेगा राज्य सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है।बताना लाजमी होगा कि विकासखंड छुरा जोकि एक कृषि प्रधान विकासखंड कहलाता है आज उसकी स्थिति ऐसी बन चुकी है के कृषि प्रधान होते हुए भी कहीं ना कहीं कुछ कमियां नजर आ रही है सूत्रों की माने तो सभी प्रकार की साधन होने के बाद बजाएं नहर की सुविधा को छोड़कर उसके बाद भी छुरा के कुछ व्यापारी ऐसे हैं जो अपनी  महत्वाकांक्षा के चलते छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर उड़ीसा जिसकी सीमा चुरकीदादर से महज पांच किलोमीटर की दूरी है सांथ ही रसेला से भी उड़ीसा की सीमा लगी हुई है जंहा पर किसान धान की खेती  करते है किन्तु उन किसानों को ओड़िसा सरकार हमारे छत्तीसगढ़ की सरकार की तरह उत्पादन का मूल्य नही देती है ओड़िसा राज्य में सरकारी मंडी में धान का मूल्य  1750रुपये प्रति क्विंटल  है तो वंही हमारे छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार 2500 रुपया समर्थन मूल्य की दर से धान खरीदती है,जिसका भरपूर लाभ छुरा क्षेत्र के बिचौलीये उठाते है जो ओडिशा से फसल कटाई के बाद धान की खरीदी कर छत्तीसगढ़ में लाते हैं और उस धान को बकायदा मंडियों में बेचा जाता है सांथ ही कुछ किसानों जिनका पट्टा पहले से ही व्यपारियो के पास जमा रहता है और कुछ किसान इस तरह के भी होते है जिनके खेत अनपजाऊ है और ना उन्होंने अपने खेत मे धान नही बोया था उस जमीन के पट्टे से व्यापारी और बिचौलियों द्वारा उन जमीनों का भी पंजीयन करवा लेते है,बिचौलियों को लाभ पहुँचाने के लिये चंद रुपयों की लालच में आकर अपना पट्टा दे देते है और धान खरीदी केंद्रों में पहुँचते है और जब शासन द्वारा धान का भुगतान उनके खाते में पहुँचता है तो वो अपना कमीशन लेकर सारा पैसा उस बिचौलियों को दे देते है।और शासन को चुना लगाकर मुनाफा कमाते हैं सूत्रों का कहना है कि बिचौलियों और अपना पट्टा देने बालो की बीच एक सौदा होता है जिसमे समर्थन मूल्य का सारा पैसा व्यापारी और विचौलियों को मिलता है अगर सरकार बोनस देती है तो उसका आधा आधा रकम बाट लिया जाता है और इस तरह  छत्तीसगढ़ सरकार को इस बात की भनक तक नहीं लगती है इतना ही नही इन बिचौलियों की राजनीतिक पकड़ और आदिम जाति सहकारी सोसाईटी मार्यादित-छुरा में कुछ लोग धान खरीदी केंद्रों में पदस्थ है जिनपर  छुरा थाना में अपराध क्रमांक 44/2013 व धारा 376,506,452,34 एवम 417 के तहत दिनांक 19-04-2013 को अपराध दर्ज हुआ था बलात्कार जैसे गंभीर आरोप में छः माह तक जेल में रहने के बाद भी विभाग ने अपने कर्मचारी को किसी भी तरह की विभागीय कार्यवाही नही की थी जो कि सामूहिक बलात्कार के अपराध में जेल जा चुके थे सांथ ही जेल से छूटने के बाद वापस नॉकरी में बुला लिया था जबकि छुरा क्षेत्र आदिवासी ब्लॉक होने के सांथ सीधे व सरल लोगो का क्षेत्र है मंडी धान बेचने महिलायें भी आती है और कई महिला भी कृषक है इस तरह के लोगो आज इस विभाग में सम्मान से एक ही जगह फिर पदस्थ है।जो कि कितना उचित है ये तो आदिम जाति सहकारी सोसाईटी मार्यादित-छुरा विभाग ही जाने ज्ञात हो कि पिछले वर्ष के पदस्थ एस डी एम बीआर साहू व छुरा दानेदार कृष्ण कुमार वर्मा की सक्रियता व लगातार दौरा के चलते उड़ीसा से आने बाली धान पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की गई थी और बिचौलियों की कमर तोड़ दी गई थी जिससे इन बिचौलियों में हड़कंप मच गया था एस डी एम व थानेदार कृष्ण कुमार वर्मा ने ओड़िसा से आने बाली धान एवम व्यपारियों पर लगाम लगाई थी और जो कभी भी विकास खण्ड छुरा में नही हुआ वो इन दोनों जिम्मेदार अधिकारियों ने कर दिखाया था जिसके चलते अब इन कालाबाजारी करने वालों को लगने लगा है कि जब तक छुरा के थानेदार कृष्ण कुमार वर्मा छुरा में  रहेंगे तब तक उनका कारोबार फ़लेगा फुलेगा नहीं इसी बात को सोचते हुए कुछ व्यापारी मिलकर यह चाहते हैं कि कृष्ण कुमार वर्मा को कोई किसी भी तरह से छुरा थाने से हटाया जाए ताकि नया थानेदार जब तक कुछ समझे और बिचौलियों की धान मंडियों तक पहुंच सके,सूत्रों की माने तो छुरा थानेदार कृष्ण कुमार वर्मा को हटाने की चर्चा जोरों पर है तो वहीं कुछ बुध्दिजीवीयों का मानना है कि कृष्ण कुमार वर्मा जैसा थानेदार बहुत ही विरले मिलते है और ये थानेदार ही छुरा क्षेत्र को संभाले तो वंही कुछ छोटभैया नेता होटल और चाय दुकानों में कृष्ण कुमार वर्मा को छुरा थाने से हटाने की जुगत में है  जिससे कालाबाजारी इस वर्ष जोरों से चल सके इस काम में  कुछ  बड़े व्यापारी गण और  कर्मचारी भी अपनी एकजुटता  दिखा रहे हैं की थानेदार वर्मा यहां से  निकल जाए इसके बावजूद आम नागरिक  व  कुछ समाज सेवक चाहते हैं यह कालाबाजारी को रोकने के लिए के के वर्मा का इस थाने में बने रहना अनिवार्य सा हो गया है। देखना अब यह है की प्रशासन जनता की सुनेगी या कालाबाजारी करने वालों की ये छुरा क्षेत्र में अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में सोसायटी के जिले के अधिकारी से सम्पर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नही  उठाया गया  ।

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